18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन घर में जरूर करें ये काम। इससे किस्मत चमक उठेगी और पैसा ही पैसा बरसेगा।

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18 अप्रैल को अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ है, तो घर में ये काम जरूर करें। इससे किस्मत चमक उठेगी और पैसा ही पैसा बरसेगा।
हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का बड़ा महत्व है। वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय तृतीया इस बार 18 अप्रैल को है। 11 साल बाद इस दिन 24 घंटे का सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग बन रह है, जो 18 अप्रैल को 4 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर रात 3 बजकर 3 तक रहेगा। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त कहते हैं और इस दिन को परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।अक्षय तृतीया के मौके पर स्वर्णाभूषण की खरीदारी की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से समृद्धि आती है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा सफेद कमल या सफेद गुलाब से होती है। अक्षय तृतीया का सर्वसिद्धी मुहुर्त के रूप में विशेष महत्व है।
दान करने की परंपरा
कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान जरूर करना चाहिए। भले ही आपके पास अधिक धन न हो, तो भी अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान करने से दान करने वाले व्यक्ति का आने वाला समय अच्छा होता है और उसे दुख दूर होते हैं। अक्षय तृतीया को शास्त्रों में अक्षय पुण्य और धनलाभ प्रदान करने वाला कहा जाता है। इस दिन व्यक्ति जो भी शुभ काम करता है उसका पुण्य कभी भी खत्म नहीं होता।
मां लक्ष्मी की पूजा करें
इस दिन तुलसी की सेवा करने से धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है। तुलसी के पौधे पर नियमित रूप से दीपक लगाने और पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। लक्ष्मी माता का केसर और चंदन से पूजन करें। इससे आपको आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थल में रखें।ये सभी चीजें दान करें
इस दिन अपने घर या कार्यालय में रखी धन की अलमारी उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार पर अगर लगी हो तो यह धनवृद्धि में लाभदायक होगी। साथ ही इसमें लाल रोली को लाल कपड़े में बांधकर रख दें। इस दिन सत्तू खाने भी काफी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही ब्राह्मणों को चने की दाल, ककड़ी, तरबूज और सत्तू-घी-शक्कर भी दान किया जाता है। सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दाईं ओर एक घी का दीया जरूर जलाएं। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
क्यों मनाते हैं
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से परशुराम का अवतार अक्षय तृतीया पर हुआ था। बद्रीनारायण के पट भी इसी दिन खुलते हैं। वृंदावन के बांके बिहारी के चरण दर्शन भी अक्षय तृतीया पर होते हैं। महाभारत युद्ध का अंत भी इसी दिन हुआ था। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव ने गन्ने के रस को ग्रहण कर वर्षीतप का पारणा किया था।
नाम के पीछे का रहस्य
अक्षय तृतीया पर्व के दिन स्नान, होम, जप, दान आदि का अनंत फल मिलता है, इसलिए भारतीय संस्कृति में इसका बड़ा महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। अक्षय यानी जो जिसका कभी क्षय न हो या जो कभी नष्ट न हो। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।

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