इन वृक्षों की पूजा से जीवन बदल सकता हैं

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इन वृक्षों की पूजा से जीवन बदल सकता हैं

आज इस युग मैं जंहा हर दिन पेड़ काटे जा रहे हैं, प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, आने वाली पीढ़ी को एक दिन दूषित हवा ही प्राप्त होगी, आज जो ऑक्सीजन हमे मुफ्त मिल रही, एक समय आएगा जब इसकी कीमत लगेगी । हमने आज भी नई पीढी को वृक्षारोपण का महत्व नही समझाया ,एक समय था कि वृक्ष सिर्फ हवा , ऑक्सीजन , फल, फूल आदि तक के काम ही नही वरना इन वृक्षों की पूजा करके जीवन के कई सुखों का आनन्द लिया जाता था । पर आज न हम जानते कि किस वृक्ष मैं किस देव का वास है, और किस तरह पूजा करके हम अपने स्वास्थ्य और घर परिवार मैं सुख समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं।

आइए कुछ देव वृक्षों के बारे मैं जानते है ।

पीपल वृक्ष
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शास्त्रों में पीपल को देव वृक्ष कहा गया है । पेड़ों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है पीपल का वृक्ष । इस पेड़ की मात्र परिक्रमा से ही कालसर्प जैसे ग्रह योग के बुरे प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है । शास्त्रों के अनुसार इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास भी माना गया है ।
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने तो पीपल के वृक्ष को स्वयं अपना ही स्वरूप बताया है । स्कन्दपुराण में कहा गया है कि पीपल के मूल में विष्णु,तने में केशव , शाखाओं में नारायण पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत भगवान निवास करते हैं ।

यदि हम पीपल को रोज जल अर्पित करते हैं, और उसकी जड का रविवार छोड़कर स्पर्श करते है,तो यकीन मानिये की आपकी कई बीमारी का अंत हो जाता है । वैसे भी पीपल की पूजा से गुरु और शनि ग्रह की शांति होती है ।
बरगद या वटवृक्ष
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बरगद को वटवृक्ष कहा जाता है। हिंदू धर्म में वट सावत्री नामक एक त्योहार पूरी तरह से वट को ही समर्पित है। पीपल के बाद बरगद का सबसे ज्यादा महत्व है। पीपल में जहां भगवान विष्णु का वास है वहीं बरगद में ब्रह्मा, विश्णु और शिव का वास माना गया है। हालांकि बरगद को साक्षात शिव कहा गया है। बरगद को देखना शिव के दर्शन करना है।महिलाएं वट सावित्री की पूजा करके ही पति की दीर्घायु की कामना करती है।

नीम का वृक्ष
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नीम के पेड़ का औषधीय के साथ-साथ धार्मिक महत्त्व भी है। मां दुर्गा का रूप माने जाने वाले इस पेड़ को कहीं-कहीं नीमारी देवी भी कहते हैं। इस पेड़ की पूजा की जाती है। कहते हैं कि नीम की पत्तियों के धुएं से बुरी और प्रेत आत्माओं से रक्षा होती है।

हर शुक्ल पक्ष की अष्टमी को सुबह 8 बजे माँ दुर्गा का वास इस वृक्ष मैं रहता है । विधिवत पूजा करने से घर मैं आ रही समस्या का हल अवश्य निकलता हैं । नीम की पूजा से लो बीपी की समस्या से भी मुक्ति मिलती हैं ।

केले का पेड़
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केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है और कई धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। केले के पत्तों में प्रसाद बांटा जाता है। माना जाता है कि समृद्धि के लिए केले के पेड़ की पूजा अच्छी होती है। जिन कन्याओ के विवाह मैं समस्या आती हो उन्हें इस पेड़ की पूजा से लाभ प्राप्त होता हैं ।

अनार का वृक्ष
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पुरातन काल से लेकर आज तक जब भी किसी यंत्र का सृजन करना होता है,तो अनार की कलम बगैर सम्भव नही होता हैं।
अनार के वृक्ष से जहां सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता हैं वहीं इस वृक्ष के कई औषधीय गुण भी हैं। पूजा के दौरान पंच फलों में अनार की गिनती की जाती है।

इन वृक्षों के अलावा और भी कई देववृक्ष हैं जैसे शमी, आम, गूलर, आक, अशोक, नारियल,बिल्व,आंवला आदि जिनकी पूजा से कई समस्याओं से निजात पाई जा सकती हैं।

कई वृक्ष की सेवा तो सिद्धि तक देती हैं । जैसे बबूल वृक्ष मैं अमावस्या की रात्रि मैं पितृ हेतु रखा गया भोजन पितृ दोष से मुक्ति दिलाता हैं । हम आगे इस विषय को निरन्तर रखेगें ।

क्या आप जानते हो कि आपके जन्म नक्षत्र का भी एक वृक्ष होता हैं, जिनको रोपित कर सेवा करने से आपके जीवन मैं समृद्धि आती है । आपके जन्म नक्षत्र और उसका वृक्ष क्या है, हम जल्दी ही जानकारी देंगे ।

यदि घर मैं कोई देव वृक्ष उग जाता हैं, तो क्या निकालना उचित होता हैं, क्या करे , कैसे करे कि कोई दोष नही लगे ।

कल मिलता हूं।

चलते चलते
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आपको जो आज ताजी हवा मिल रही और जो मुफ्त मैं करोडो का आक्सीजन मिल रहा वो आपको पूर्वजो की देन से मिल रहा है,उनके द्वारा किये गए वृक्षारोपण से आज आप ताजी सांस ले पा रहे हो, लेकिन क्या आपकी आने वाली पीढ़ी को आप क्या जहरीली हवा दोगे । जागो, सोचो, समझो, और इस बारिश मैं कम से कम 1 वृक्ष लगाकर उसकी सेवा जरूर करो । आपको अच्छा लगेगा,पर उससे ज्यादा अच्छा आने वाली पीढ़ी को लगेगा । तो कितने मेम्बर्स मुझे प्रोमिस कर रहे कि हम एक वृक्ष अवश्य लगाकर सेवा जरूर करेगे ।

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