यात्रा को आरंभ करने के लिये सही मुहूर्त

0
731

यात्रा को आरंभ करने के लिये सही मुहूर्त


हम भारतीयों में किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने के लिये सही समय का चयन करना ही मुहूर्त चयन कहलाता है। हर व्यक्ति कि इच्छा होती है कि उसे अपने हर शुभ कार्य में सफलता मिले इसलिए उसे सुनिश्चित करने के लिए हम मुहूर्त देखते है। आज के युग में बहुत से लोग इन बातो को नहीं मानते है लेकिन जब उनका कार्य बिगड़ जाता है, लाभ के बजाय हानि होती है तब व्यक्ति को मुहूर्त की महत्ता समझ में आने लगती है ऐसे लोग फिर दोबारा भविष्य में कोई शुभ कार्य करते मुहूर्त को अवश्य ही मानते है।यहाँ पर हम आपको सफल यात्रा के कुछ खास और आसानी से सवयं समझने वाले मुहूर्त बता रहे है। ध्यान रहे यह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष अर्थात् दोनों पक्षों की प्रतिपदा तिथि से चतुर्दशी तिथि तक के लिये समान रूप से लागू होते है।

प्रथमा तिथि ( किसी भी पक्ष की 1st ) को प्रतिपदा या पड़वा के नाम से भी पुकारते है। इसमें बुद्धिमान व्यक्तियों को किसी भी रूप में कभी भी कोई भी यात्रा नहीं करनी चाहिये।

द्वितीया तिथि ( किसी भी पक्ष की 2nd ) यानि दोज के दिन यात्रा करना बहुत शुभ होता है। इस दिन यात्रा से कार्य के सफल होने की पूर्ण सम्भावना होती है।

तृतीया / तीज ( किसी भी पक्ष की 3rd ) तिथि में यात्रा करना भी बहुत शुभ होता है। इससे सफलता ,निरोगता और यश कि प्राप्ति होती है।

चतुर्थी की यात्रा ( किसी भी पक्ष की 4th ) दुर्घटना / मृत्यु का भय होता है – ”चतुर्थी मरणाद्भयम्”॥ इसलिए इस दिन यात्रा कतई नहीं करनी चाहिए ।

पंचमी के दिन ( किसी भी पक्ष की 5th ) यात्रा करना हर दिशा,दशा से सिद्धि दायक होती है, इसमें विजय प्राप्ति के सभी योग बनते है ।

षष्ठी तिथि के दिन ( किसी भी पक्ष की 6th ) की यात्रा से हानि होती है। ”षष्ठीत्वं न लाभाय”। इसलिए इस दिन यात्रा टालना ही बेहतर है ।

सप्तमी के दिन ( किसी भी पक्ष की 7th ) यात्रा करना अशुभ फलो को न्यौता देना है। इस दिन केवल धार्मिक यात्रा ही की जा सकती है।

अष्टमी के दिन ( किसी भी पक्ष की 8th ) यात्रा करने वाले को रोग घेर सकते है , ”यात्रा रोगोत्पादक”। अगर सफ़र में स्वास्थ्य ख़राब होने कि नौबत हो तो यात्रा करने से क्या लाभ है ।

नवमी के दिन ( किसी भी पक्ष की 9th ) यात्रा करने से बिना किसी बात के यात्रा में अडंगा लग जाताऐ है। व्यक्ति के मन में निराशा, वैराग्य के भाव उत्पन्न हो जाते है ।

दशमी की यात्रा ( किसी भी पक्ष की 10th ) बहुत उत्तम होती है। इस दिन कि यात्रा व्यक्ति और उसके पूरे परिवार को श्रेष्ठ फल देने वाली होती है ।

एकादशी की ( किसी भी पक्ष की 11th ) यात्रा सदैव बहुत ही शुभ होती है। ”एकादशी तु सर्वत्र प्रशस्ता सर्व कर्मसु”। इस दिन कि गयी यात्रा से मनवाँछित फल मिलता है।

द्वादशी की ( किसी भी पक्ष की 12th ) यात्रा धनहानि कराने वाली होती है- ”द्वादशीत्वर्थनाशाय”। इस दिन कि यात्रा से असफलता और निराशा प्राप्त होने कि सम्भावना होती है।

त्रयोदशी की ( किसी भी पक्ष की 13th ) यात्रा सुलह, समझौता ,साझेदारी के लिए बहुत शुभ मानी गई है। इस लिए इन कार्यों के लिए इस तिथि का चयन करना ही बुद्धिमानी है ।

चतुर्दशी की ( किसी भी पक्ष की 14th ) यात्रा भी शुभ नहीं है ।अत: इस दिन भी यात्रा को टालना ही श्रेयकर माना गया है ।

अमावस्या तिथि के दिन भी यात्रा करना मना है- ”अमावस्यां न यात्रा कुर्यात्”।←अत: इस दिन भी यात्रा नहीं करनी चाहिए ।

पूर्णिमा तिथि को दिन में किसी भी कार्य से यात्रा नहीं करनी चाहिये क्योंकि पूर्णमासी को दिन में यात्रा करना असफलता का प्रतीक है लेकिन इस दिन रात्रि में यात्रा करने से शुभ फलों कि प्राप्ति होती है । यहाँ पर यह ध्यान रखे कि प्रतिदिन यात्रा करने वालों को कोई भी मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं है । चूँकि ज्योतिष विज्ञान ने प्रतिपदा,चतुर्थी ,षष्ठी, सप्तमी,अष्टमी, नवमी,,द्वादशी तिथियों के प्रत्येक पक्ष को छिद्र माना है, और चतुर्दशी को यात्रा तो शुभ योग/ नक्षत्र आदि होने के बाद भी वर्जित है । इस कारण इन सभी तिथियों में सभी शुभ-कार्य और यात्रा मना हैं। कहा भी गया है- षडष्टौ नव चत्वारि पक्ष छिद्राणि वर्जयेत्। सापि नक्षत्रसम्पन्नां वर्जयेत्तु चतुर्दशीम्॥

चूँकि द्वितीया,तृतीया,पंचमी,दशमी,एकादशी और त्रयोदशी कि यात्राएं सदैव लाभ दायक मानी गयी है अत: किसी भी व्यक्ति को अपनी यात्रा इन्ही दिनों में करने का प्रयास करना चाहिए ।

Comments

comments

LEAVE A REPLY