पुत्र, धन, तरक्की चाहिए तो कीजिए ये उपाय

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सभी की लाइफ में विभिन्न प्रकार की समस्यायें जीवन के साथ-2 चलती रहती है। यह समस्यायें वैसे तो दैनिक कार्यो को भी प्रभावित करती रहती है। लेकिन कभी-2 व्यक्ति इन समस्यायें के चक्रव्यूह में ऐसा फॅस जाता है कि इन समस्याओं से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इस प्रकार की समस्याओं को छोटे-छोटे उपायों के द्वारा दूर किया जा सकता है। इन उपायें के लिए किसी विशेष प्रबन्ध आदि की आवश्यकता नहीं होती है।

1- कन्या जन्म के पश्चात पुत्र की कामना करने वाले लोग कन्या के नामकरण वाले दिन उस कन्या के चरण स्पर्श करते हुये पुत्र जन्म की प्रार्थना करें एंव पूरा परिवार उस दिन जलेबी व खीर का प्रसाद वितरण करें एंव ग्रहण करें।

2- यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय से रोग ग्रस्त है और दवाई करने के बावजूद भी स्वास्थ्य लाभ नहीं पा रहा है। ऐसे व्यक्ति के तकिये के नीचे सहदोई या पीपल की जड़ रखने से स्वास्थ्य लाभ शीघ्र होने लगता है।

3- यदि आप धन की चाह रखते है तो दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा की ओर सिर करके सोये। ज्ञान वृद्धि के लिए पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोना बेहतर होगा।

4- जिस घर में कोई बड़े सामारोह का भोजन बन रहा हो तो उस भण्डार घर में कोयला तथा घर के मन्दिर में सभी बने भोज्य पदार्थ की थाली रखने से भोजन की कमी नहीं रहती है।

5- घर के मुखिया को कभी भी घर खाली हाथ नहीं आना चाहिए। कुछ न कुछ अवश्य लेकर आना चाहिए। इससे घर में बरक्कत व आपसी प्रेम बना रहता है।

6- घर में सभी घडि़यॉ चालू हालत में रहनी चाहिए। घड़ी के रूकने से वहॉ रहने वालों का भाग्य भी रूक जाता है।

7- वर्ष में एक बार किसी भी अमावस्या को खीर व जटा नारियल लेकर पूरे घर में घूमकर मुख्यद्वार पर नारियल तोड़कर एंव खीर को कुत्ते को खिला देना चाएि। इस उपाय को करने से घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है।

8- मृत्यु तुल्य पीड़ा से मुक्ति के लिए जौ के आटे में काले तिल व सरसों का तेल मिलाकर मोटी सी रोटी बनाकर रोगी के उपर से 7 बार उतार किसी भैंस या गाय को खिला देंने से संकट टल जाता है।

9- विद्यार्थी वर्ग को बुद्धि व ज्ञान प्राप्त करने के लिए मंगलवार या शनिवार को सुन्दर का काण्ड का पाठ करना चाहिए।

10- जिस बालक का पढ़ने में मन नहीं लगता हो उसे प्रत्येक रविवार को सूर्य पूजन एंव बिना नमक का भोजन करना चाहिए। तत्पश्चात लाल वस्तु के साथ गुड़ व माचिस दान करने से मॉ सरस्वती की कृपा बनी

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