चावल के ये उपाय बनाएंगे आपको मालामाल

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चावल के ये उपाय बनाएंगे आपको मालामाल chawal ke achuk upay

ज्योतिष शास्त्र में गरीबी दूर करने के लिए कई कारगर उपाय बताए गए हैं. इन उपायों को अपनाने से सभी प्रकार की ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं. यदि किसी वजह से धन प्राप्त करने में कोई समस्या आ रही हो तो इन उपायों से वे सभी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं. यदि आप भी किसी ग्रह बाधा से पीडि़त हैं और आपके पर्स में अधिक समय तक पैसा नहीं टिकता तो यह उपाय अवश्य करें. पूजन में अक्षत का उपयोग अनिवार्य है. किसी भी पूजन के समय गुलाल, हल्दी, अबीर और कुंकुम अर्पित करने के बाद अक्षत चढ़ाए जाते हैं. अक्षत न हो तो पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती. शास्त्रों के अनुसार पूजन कर्म में चावल का काफी महत्व रहता है. देवी-देवता को तो इसे समर्पित किया जाता है साथ ही किसी व्यक्ति को जब तिलक लगाया जाता है तब भी अक्षत का उपयोग किया जाता है. भोजन में भी चावल का उपयोग किया जाता है. कुंकुम, गुलाल, अबीर और हल्दी की तरह चावल में कोई विशिष्टï सुगंध नहीं होती और न ही इसका विशेष रंग होता है. अत: मन में यह जिज्ञासा उठती है कि पूजन में अक्षत का उपयोग क्यों किया जाता है? जानिए इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं…

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लाल कपड़े में 21 पीले चावल के दाने बांधने के बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें. पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें. पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छिपाकर रख लें. ऐसा करने पर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधी मामलों में चल रही रुकावटें दूर हो जाती हैं. ऐसा करने पर धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी.
ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें. इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए. सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए. नोट के साथ बिल या अन्य पेपर न रखें. किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें. चावल को पीला करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें. इसके लिए हल्दी में थोड़ा पानी डालें. अब गीली हल्दी में चावल के 21 दानें डालें.
इसके बाद अच्छे से चावल को हल्दी में रंग लें. चावल रंग जाए इसके बाद इन्हें सुखा लें. इस प्रकार तैयार हुए पीले चावल का उपयोग पूजन कार्य में करें. शास्त्रों के अनुसार पीले चावल का उपयोग पूजन कर्म में करने से देवी-देवताओं की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है. किसी भी देवी-देवता को निमंत्रण देने के लिए चावल को पीला किया जाता है. पीले चावल देकर आमंत्रित किए गए भगवान अवश्य ही भक्त के घर पधारते हैं. यदि पर्स में पीले चावल रखेंगे तो महालक्ष्मी की कृपा भी आप बनी रहेगी.

दरअसल अक्षत पूर्णता का प्रतीक है. अर्थात यह टूटा हुआ नहीं होता है. अत: पूजा में अक्षत चढ़ाने का अभिप्राय यह है कि हमारा पूजन अक्षत की तरह पूर्ण हो. अन्न में श्रेष्ठ होने के कारण भगवान को चढ़ाते समय यह भाव रहता है कि जो कुछ भी अन्न हमें प्राप्त होता है वह भगवान की कृपा से ही मिलता है. अत: हमारे अंदर यह भावना भी बनी रहे. इसका सफेद रंग शांति का प्रतीक है. अत: हमारे प्रत्येक कार्य की पूर्णता ऐसी हो कि उसका फल हमें शांति प्रदान करे. इसीलिए पूजन में अक्षत एक अनिवार्य सामग्री है ताकि ये भाव हमारे अंदर हमेशा बने रहें
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भगवान को चावल चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चावल टूटे हुए न हों. अक्षत पूर्णता का प्रतीक है अत: सभी चावल अखंडित होने चाहिए. चावल साफ एवं स्वच्छ होने चाहिए. शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से शिवजी अतिप्रसन्न होते हैं और भक्तों अखंडित चावल की तरह अखंडित धन, मान-सम्मान प्रदान करते हैं. श्रद्धालुओं को जीवनभर धन-धान्य की कमी नहीं होती हैं. पूजन के समय अक्षत इस मंत्र के साथ भगवान को समर्पित किए जाते हैं-.. अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कमाक्ता: सुशोभिता:. मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर॥ इस मंत्र का अर्थ है कि हे पूजा! कुंकुम के रंग से सुशोभित यह अक्षत आपको समर्पित कर रहा हूं, कृपया आप इसे स्वीकार करें. इसका यही भाव है कि अन्न में अक्षत यानि चावल को श्रेष्ठ माना जाता है. इसे देवान्न भी कहा गया है. अर्थात देवताओं का प्रिय अन्न है चावल. अत: इसे सुगंधित द्रव्य कुंकुम के साथ आपको अर्पित कर रहे हैं. इसे ग्रहण कर आप भक्त की भावना को स्वीकार करें.
इसके बाद शेष चावल को मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें. ऐसा हर सोमवार को करें. इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे. धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई सटीक उपाय बताए गए हैं. जिन्हें अपनाने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और आय बढऩे में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जाती हैं. एक अन्य उपाय के अनुसार किसी भी शुभ मुहूर्त या होली के दिन या किसी भी पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठें. सभी नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद लाल रंग का कोई रेशमी कपड़ा लें. अब उस लाल कपड़े में पीले चावल के 21 दानें रखें. ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दाना न रखें. उन दानों को कपड़े में बांध लें.

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