धनतेरस का महत्व, पूजन विधि व शुभ मुहूर्त – Dhanteras Pujan Vidhi

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Dhanteras Pujan Vidhi – धनतेरस का महत्व, पूजन विधि व शुभ मुहूर्त

हिंदी धर्म में होने वाले सभी त्योहारो को काफी धूम-धाम से मनाया जाता है. धनतेरस एक ऐसा त्यौहार है जो छोटी दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है. इस दिन लोग कई वस्तुओ की खरीददारी करते हैं क्योंकि धनतेरस में खरीददारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है.

 

यह त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है क्योंकि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए यह त्यौहार इस तिथि में मनाया जाता है.

 

जब धन्वन्तरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में कलश था जिसके कारण इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. इस दिन कई लोग धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं. दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं.

धनतरेस तिथि – 28 अक्टूबर 2016

धनतेरस पूजा मुहूर्त Dhanteras auspicious worship

  • सुबह 09.00 से दोपहर 12.00,
  • दोपहर 01.30 से 03.00,
  • शाम 06.00 से रात्रि 09.00 तक।

धनतेरस में खरीददारी का मुहूर्त- Dhanteras auspicious shopping

  • दोपहर 48 से 12.15, 01.30 से 03.00,
  • शाम 00 से रात्रि 09.00 तक।

धनतेरस पूजन विधि Dhanteras Puja Vidhi

धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है. इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है. कहा जाता है की धनतेरस के दिन जितनी खरीददारी की जाती है घर उतना ही धन-धान्य से भरता है.

देवता यमराज के पूजन की विधि The Method Worship of Yama

धनतेरस के दिन देवता यमराज की पूजा की जाती है. साल का एक यही दिन है जिस दिन देवता यमराज की पूजा की जाती है. इस दिन रात्रि के समय देवता यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है.

  • धनतेरस के दिन रात्रि में एक आते का दिया बनाये. अब इस दिये को घर के मुख्य द्वार पर रखें.
  • रात के समय घर की स्त्रियां दीपक में तेल डालकर नई रूई की बत्ती बनाकर, चार बत्तियां जलाये तथा दीपक की बत्ती दक्षिण दिशा की ओर रखें.
  • अब जल, रोली, फूल, चावल, गुड़, नैवेद्य आदि सहित दीपक जलाकर स्त्रियां यम का पूजन करें.
  • दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो.

भगवान कुबेर की पूजन विधि The Method Worship of Kuber

धनतेरस की पूजा सही प्रकार तथा सही विधि में करनी चाहिए. इससे घर में सुख-शांति में अनुभव होता है तथा घर में धन की कमी नही होती. साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है.

  • धनतेरस के दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर की पूजा करें.
  • इसके बाद देव कुबेर को फूल चढाएं.
  • अब भगवान कुबेर का ध्यान करें और बोलें

 

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कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर हम आपका ध्यान करते हैं.

  • इसके बाद भगवान कुबेर का धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें और मन्त्र पढ़े.

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये

धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।’

धनतेरस की पौराणिक कथा Story of Dhanteras

एक जमाने में एक राजा हुआ करते थे. जिनका नाम हेम था। दैव कृपा के कारण उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुयी थी. जब उनके पुत्र की ज्योंतिषियों द्वारा बनवाई गयी तो उससे पता चला की बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी. जब राजा को यह बात पता चली तो उसे बहुत दुःख हुआ. इसलिए राजा ने अपने पुत्र को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े.

धनतेरस की पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा How to do Dhanteras Worship

दैवयोग से एक दिन वहां से एक राजकुमारी गुजर रही थी तभी राजकुमार ने राजकुमारी को देखा और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया. जब उन दोनों ने विवाह कर लिया तो विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे. जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा. इसके बाद यमदूत ने यमराज से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु के लेख से मुक्त हो जाए.

तब यमराज बोले कार्तिक कृष्ण पक्ष की रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं.

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