संत और भूखे की कहानी | Heart Touching Emotional Story

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संत और भूखे की कहानी | Heart Touching Emotional Story

भगवान का प्रेम बिना किसी शर्त के होता है, वह इसलिए आपसे प्रेम नहीं करता क्योंकि आप उसकी सेवा करते है, वह कोई लेन देन व्यापार नहीं करता है. आयें आपको इससे एक कहानी के द्वारा समझाता हूँ :
एक संत जिस की हमेशा कि आदत थी की अकेला भोजन नहीं करता था …हर किसी को निमंत्रम दे देता था, या बुला लाता था. मगर एक दिन ऐसा हुआ बहुत खोजा लेकिन कोई मिला ही नहीं या तों लोग भोजन कर चुके थे या फिर भोजन करने जा रहे थे या कुछ कहीं निमंत्रित थे. कोई राजी ही नहीं हुआ आने को और अकेले वह भोजन नहीं करता, किसी के साथ में ही भोजन करता , बांट कर हि भोजन करता. उसने सोचा आज भुखा ही रहना पडेगा…. तभी द्वार पर एक बूढे आदमी ने दस्तक दी और उसने कहा में बहुत भुखा हू क्या कुछ खाने को मिल सकता है.
उसने कहा मेरे धन्यभाग , आओं में प्रतिक्षा ही कर रहा था, जरुर तुम्हैं परमात्मा ने ही भेजा होगा उसकी करुणा अपरंपार है उसने मेहमान को बिठाया और थाली लगाई भोजन परोसा और मेहमान भोजन शुरु करने ही जा रहे थे कि उसने देखा कि इसने तो भगवान का नाम ही नहीं लिया . भोजन के पहले भगवान का नाम तो लेना चाहिए प्रार्थना तो करनी चाहिये.
उसने उसका हाथ पकड लिया इससे पहले की कोर मूहँ में जाये उसने कहा- रुको, तुमने भगवान का नाम नहीं लिया, उस आदमी ने कहा में भगवान आदि में भरोसा नहीं करता, कोई ईश्वर नहीं है… तो मैं किसका नाम लू… उस संत ने कहा फिर भोजन न कर सकोगे और तभी अचानक भगवान की आवाज सूनाई पडी ‘अरे पागल में इस आदमी को सत्त्तर साल से भोजन दे रहा हू और इसने एक भी बार मेरा नाम नही लिया और तुने इसका बढा हुआ हाथ पकड लिया….

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