किसकी मृत्यु कैसे होगी? इन 3 चीजों से फौरन चलता है पता

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किसकी मृत्यु कैसे होगी?

हिन्दू धर्मशास्त्रों में न केवल जीवन के रहते अच्छे या बुरे कर्मों को सुख और दु:ख की वजह बताया गया है, बल्कि इन सद्कर्मों व दुष्कर्मों को सुखद व दु:खद मृत्यु नियत करने वाला भी बताया गया है। इसे दूसरे शब्दों में सद्गति व दुर्गति भी कहा जाता है। क्यूंकि मृत्यु अटल सत्य है, इसलिए हर ग्रंथ में हमेशा अच्छे गुण, विचार व आचरण को अपनाने की सीख दी गई है।

किसकी मृत्यु कैसे होगी?

किसकी मृत्यु कैसे होगी?

खासतौर पर अक्सर कई लोगों की ऐसी प्रवृत्ति उजागर होती है कि वे ज़िंदगी को अच्छे कामों से संवारने की कोशिशों से बचते रहते हैं, किंतु मृत्यु को सुधारने की गहरी चाहत रखते हैं। मृत्यु से जुड़े कई रहस्य हिंदू धर्मशास्त्र गरुड़ पुराण में उजागर हैं। इसी कड़ी में जानिए मृत्यु से जुड़ी वे 3 खास बातें, जो बताती हैं कि किसकी मृत्यु कैसे होगी…

किसकी मृत्यु कैसे होगी?

किसकी मृत्यु कैसे होगी?

हिन्दू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में जीवन में किए अच्छे-बुरे कामों के मुताबिक मृत्यु के वक्त कैसे हालात बनते हैं? इसके बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं बताया है। जानिए किस काम से कैसी मौत मिलती है?

किस काम से कैसी मौत?

किस काम से कैसी मौत?

जो लोग सच बोलते हैं, ईश्वर में आस्था और विश्वास रखते हैं, विश्वासघाती नहीं होते, किसी का दिल नहीं दुखाते, किसी को धोखा नहीं देते – मतलब अच्छे लोग जो ज़िंदगी को अच्छे से बिताते हैं, उनकी मृत्यु सुखद होती है।

किस काम से कैसी मौत?

किस काम से कैसी मौत?

जो लोग दूसरों को आसक्ति, मोह का उपदेश देते हैं, अविद्या या अज्ञानता, द्वेष या स्वार्थ, लोभ की भावना फैलाते हैं, वे मृत्यु के समय बहुत ही कष्ट उठाते हैं।

किस काम से कैसी मौत?

झूठ बोलने वाला, झूठी गवाही देने वाला, भरोसा तोडऩे वाला, शास्त्र व वेदों की बुराई करने वालों की दुर्गति सबसे ज्यादा होती है। उनकी बेहोशी में मृत्यु हो जाती है। यही नहीं ऐसे लोगों को लेने के लिए भयानक रूप और गंध वाले यमदूत आते हैं, जिसे देखकर जीव कांपने लगता है। तब वह माता-पिता व पुत्र को याद कर रोता है।

किस काम से कैसी मौत?

किस काम से कैसी मौत?

ऐसी हालात में वह चाहकर भी मुंह से साफ नहीं बोल पाता। उसकी आंखे घूमने लगती है। मुंह का पानी सूख जाता है, सांस बढ़ जाती है और अंत में कष्ट से दु:खी होकर प्राण त्याग देता है। मृत्यु को प्राप्त होते ही उसका शरीर सभी के लिए न छूने लायक और घृणा करने वाला बन जाता है।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में कुछ संकेत बताए गए हैं जिनसे यह मालूम किया जा सकता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु कितने समय बाद हो सकती है। शिवजी ने बताया कि जब किसी व्यक्ति का शरीर अचानक पीला या सफेद पड़ जाए और ऊपर से कुछ लाल दिखाई देने लगे तो समझ लेना चाहिए कि उस इंसान की मृत्यु छह माह में होने वाली है।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

वहीं जब किसी व्यक्ति का मुंह, जिह्वा, कान, आंखें, नाक स्तब्ध हो जाए यानी पथरा जाए तो ऐसे इंसान की मौत का समय भी लगभग छह माह बाद आने वाला है, ऐसी संभावनाएं रहती हैं। जब कोई व्यक्ति चंद्र, सूर्य या आग से उत्पन्न होने वाली रोशनी को भी नहीं देख पाता है, तो ऐसा इंसान भी कुछ माह और जीवित रहेगा, ऐसी संभावनाएं रहती हैं।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

यदि किसी व्यक्ति को अचानक सबकुछ काला-काला दिखाई देने लग जाए तो ऐसे इंसान की मृत्यु का समय बहुत निकट होता है। वहीं जब अचानक किसी व्यक्ति का बायां हाथ लगातार एक सप्ताह तक अकारण ही फड़कता रहे, तो समझना चाहिए कि उसकी मृत्यु एक माह बाद हो सकती है। जिस इंसान की जीभ अचानक से फूल जाए, दांतों से मवाद निकलने लगे और स्वास्थ्य बहुत ज्यादा खराब होने लगे तो उस इंसान का जीवन मात्र छह माह शेष रह जाता है।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

उधर जब कोई व्यक्ति पानी में, तेल में, दर्पण में अपनी परछाई न देख पाए या परछाई विकृत दिखाई देने लगे तो ऐसा इंसान मात्र छह माह का जीवन और जीता है। ऐसी संभावनाएं रहती हैं। वहीं जिन लोगों की मृत्यु एक माह शेष रहती है वे अपनी छाया को भी स्वयं से अलग देखने लगते हैं। कुछ लोगों को तो अपनी छाया का सिर भी दिखाई नहीं देता है।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

किसी व्यक्ति को ध्रूव तारा दिखाई देना बंद हो जाए, तो वह इंसान ज्यादा से ज्यादा छह माह और जीवित रह पाता है। वहीं जब किसी इंसान को चंद्र और सूर्य के साथ आकाश भी लाल दिखाई देता है, जिसे कौएं और गिद्ध घेरे रहते हैं, वे भी अधिकतम छह मास जीवत जी पाते हैं। जब किसी व्यक्ति के सभी अंग अंगड़ाई लेने लगे और तालू पूरी तरह सूख जाए, तब व्यक्ति एक मास और जीवित रहता है।

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

शिवपुराण में भी हैं मृत्यु के संकेत

यदि किसी व्यक्ति को नीले रंग की मक्खियां घेरने लगे और अधिकांश समय ये मक्खियां व्यक्ति के आसपास ही रहने लगे तो समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति की आयु मात्र एक माह शेष है।

अकलमंद आदमी को मृत्यु के करना चाहिए यह काम

अकलमंद आदमी को मृत्यु के करना चाहिए यह काम

श्रीमद्भागवत में एक सुंदर उपाख्यान आता है। उसमें सात दिन में तक्षक सांप के काटने से अपनी मृत्यु होने से पूर्व राजा परीक्षित ने शुकदेव से कई प्रश्न पूछे। एक प्रश्न में वे जिज्ञासा करते हैं कि – मरते समय बुद्धिमान मनुष्य को क्या करना चाहिए? शुकदेव ने कहा – जो विशिष्ट ज्ञान को चाहते हैं, उन्हें बृहस्पति का स्मरण करना चाहिए।

अकलमंद आदमी को मृत्यु के करना चाहिए यह काम

अकलमंद आदमी को मृत्यु के करना चाहिए यह काम

शुकदेव ने बताया की – विशेष शक्ति चाहने वाले को इंद्र, सन्तानवान होने के लिए प्रजापति, सुंदर और आकर्षक दिखने की चाह रखने वाले के लिए अग्निदेव, वीरता के लिए रुद्र, लक्ष्मी की इच्छा वाले को मायादेवी का स्मरण करना चाहिए। लंबी आयु के लिए वैद्य अश्विनी कुमार, सुंदरता के लिए गंधर्व, परिवार सुख के लिए पार्वती, प्रतिष्ठा के लिए पृथ्वी-आकाश, विद्या के लिए शिव का स्मरण करना चाहिए चाहिए।

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

मौत की घड़ी सामने आ गयी थी। खाट पर लेटा हुआ अजामिल अपने बीते दिनों को याद कर रहा था। एक सुंदर स्त्री के रुप पर मोहित होकर इसने अपनी पतिव्रता पत्नी को छोड़ दिया। स्त्री के रुप जाल में उलझकर सारे अनैतिक काम किया ताकि वह प्रसन्न रहे। माता-पिता के समझाने पर उनका भी अपमान किया।

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

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अजामिल को अपने युवावस्था में किए सारे पाप याद रहे थे। अजामिल की उल्टी सांसें चलने लगी। सभी रिश्तेदार बेटे उसके सामने आकर बैठे थे। अजामिल ने देखा कि उसका छोटा बेटा नारायण पास में नहीं है। उसे अपने छोटे बेटे को पुकारा नारायण नारायण।

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

इतने में अजामिल के प्राण निकल गए। यमदूत आजामिल की आत्मा को बंदी बनाकर अपने साथ ले जाने लगे। शंख, चक्र, गदा धारण किए नारायण के समान दिखने वाले नारायण के सेवक वहां पहुंच गए। भगवान नारायण के सेवकों ने यमदूतों के बंधन से अजामिल को मुक्त करवाया। विष्णु के दूतों ने यमदूतों से कहा कि अजामिल ने मरते समय अपने पुत्र नारायण को पुकारा है।

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

इसलिए अनजाने में ही इसने भगवान नरायण का नाम लिया है इससे अजामिल जीवन भर किए हुए पापों से मुक्त हो गया है और विष्णु लोक में स्थान पाने का अधिकारी बन गया है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि जो व्यक्ति मृत्यु के समय भगवान का नाम लेता है उसे यमदूतों का भय नहीं रहता है। इसलिए लोग अपनी संतान का नाम किसी देवी देवता के नाम पर रखते हैं। गीता प्रेस से प्रकाशित कल्याण पत्रिका में अजामिल की कथा का वर्णन किया गया है।

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