पुष्य नक्षत्र | Pushya Nakshatra Yoga

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पुष्य नक्षत्र |  Pushya Nakshatra Yoga

 

   माँ सरस्वती

ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र माने गए हैं। इनमें 8 वे स्थान पर पुष्य नक्षत्र आता है। यह बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार चूँकि यह नक्षत्र स्थायी होता है और इसीलिए इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु स्थायी तौर पर सुख समृद्धि देती है।
पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है । माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किये गये कार्य सर्वथा सफल होते हैं।
पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं। पुष्य शनि में शनि के प्रभाव के कारण खरीदी हुई वस्तु स्थाई रूप बनी रहती है और बृहस्पति देव के कारण वह समृद्धिदायी होती है। गुरुवार व रविवार को होने वाले पुष्य नक्षत्र विशेष रूप से फलदायक होता है उसदिन पुष्यामृत योग बनता है।
ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगल कर्ता, वृद्धि कर्ता और सुख समृद्धि दाता कहा गया है।

लेकिन यह भी ध्यान दें कि पुष्य नक्षत्र भी अशुभ योगों से ग्रसित तथा अभिशापित होता है। शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र में किया गया कार्य सर्वथा असफल ही नहीं, उत्पातकारी भी होता है। अतः पुष्य नक्षत्र में शुक्रवार के दिन को तो सर्वथा त्याग ही दें। बुधवार को भी पुष्य नक्षत्र नपुंसक होता है। अतः इसमें किया गया कार्य भी असफलता देता है।लेकिन पुष्य नक्षत्र शुक्र तथा बुध के अतिरिक्त सामान्यतया श्रेष्ठ होता है। रवि तथा गुरु पुष्य योग सर्वार्थ सिद्धिकारक माना गया है।

एक बात का और विशेष ध्यान दें कि विवाह में पुष्य नक्षत्र सर्वथा वर्जित तथा अभिशापित है। अतः पुष्य नक्षत्र में विवाह कभी भी नहीं करना चाहिए।

इस नए वर्ष में भूमि, भवन, वाहन व ज्वेलरी आदि की खरीद फरोख्त व अन्य शुभ, महत्वपूर्ण कार्यो के लिए श्रेष्ठ माना जाने वाला पुष्य नक्षत्र बारह होंगे जो कुल 25 दिन रहेंगे क्योंकि इनमें प्रत्येक कि अवधि डेढ़ से दो दिन तक रहेगी। इसके अतिरिक्त इस पूरे वर्ष में 96 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग व 26 दिन अमृत सिद्धि योग रहेंगे, जिनमें भी कोई भी शुभ कार्य किए जा सकेंगे।

 

पुष्य नक्षत्र के विशेष उपाय
 

धन सम्बन्धी प्रयोगों , माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु उनकी साधना करने के लिए, आर्थिक संकटो को दूर करने के लिए और अपनी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए पुष्य नक्षत्र एक श्रेष्ठ दिन है । मान्यता है कि इस दिन धन सम्बन्धी किये गए उपाय शीघ्र ही फलीभूत होते है ।

पुष्यामृत योग में “हत्था जोड़ी”(एक विशेष पेड़ की जड़ जो सभी पूजा की दुकान में मिलती है) को “चाँदी की डिबिया में सिंदूर डालकर” अपनी तिजोरी में स्थापित करें । ऐसा करने से घर में धन की कमी नहीं रहती है । ध्यान रहे कि इसे नित्य धुप अगरबत्ती दिखाते रहे और हर पुष्य नक्षत्र में इस पर सिंदूर चढ़ाते रहे ।

पुष्य नक्षत्र में “शंख पुष्पी की जड़ को “चांदी की डिब्बी में भरकर उसे घर के धन स्थान / तिजोरी में रख देने से उस घर में धन की कभी कोई भी कमी नहीं रहती है ।

इसके अलावा बरगद के पत्ते को भी पुष्य नक्षत्र में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर उसे चांदी की डिब्बी में घर में रखें तो भी बहुत ही शुभ रहेगा ।

पुष्य नक्षत्र के योग मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करते हुए उन्हें गुलाब के फूल और पानी वाला नारियल अर्पित करके मां लक्ष्मी के चरणों में सात लक्ष्मीकारक कौड़ियां भी रखें। आधी रात के बाद इन कौड़ियों को घर के किसी कोने में चुपचाप गाड़ दें और माँ से अपने यहाँ स्थाई रूप से निवास करने की प्रार्थना करें । इस उपाय से धन लाभ होने के योग बनते हैं।

पुष्य नक्षत्र के दिन पूजा घर में संध्या के समय माँ लक्ष्मी के सामने दीपक में लाल कलावे की बत्ती डालकर घी का दीपक जलाएं । इससे घर में लक्ष्मी का नियमित रूप से आगमन होने लगता है। इसके बाद नियम पूर्वक माँ के सामने रुई की जगह कलावे की बत्ती डालकर ही घी का दीपक जलाया करें ।

पुष्य नक्षत्र के दिन माँ लक्ष्मी को लाल पुष्प अर्पित करें । इस दिन सांयकाल किसी भी लक्ष्मी मंदिर / मंदिर में माँ को सुगन्धित धूप अगरबत्ती, मिठाई चढ़ाने से माँ अपने भक्त से अति प्रसन्न होती है, सुख सौभाग्य आता है ।

पुष्प नक्षत्र के दिन दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिला दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इससे धन लाभ मिलेगा। माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से भी मां की कृपा आप पर बनी रहती है ।

पुष्य नक्षत्र के दिन लक्ष्मी की पूजा करते समय चांदी का सिक्का रखें। बाद में इस सिक्के को अपनी तिजोरी में रख दें। इससे आपकी तिजोरी हमेशा पैसों से भरी रहेगी ।

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