राशि के मुताबिक जानिए धनतेरस पर क्‍या खरीदना रहेगा बेहतर.

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राशि के मुताबिक जानिए धनतेरस पर क्‍या खरीदना रहेगा बेहतर-rashi anushar dhanteras par kya kharide

धनतेरस, धनत्रयोदशी और धनवंतरी जयंती भगवान हनुमान के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इसके अलावा दीर्घायु के लिए भी इस दिन यमराज के पूजन का विधान माना जाता है. इसी दिन से पंचपर्व की शुरुआत होती है.इस बार धनतेरस शुक्रवार के दिन है. हस्त नक्षत्र है, साथ ही कन्या राशि में चंद्र है, इसलिए कर्क, वृश्चिक, मीन, मिथुन और कन्या राशि के जातकों के लिए ये धन त्रयोदशी अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इस वर्ष धन त्रयोदशी का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि दीपावली के दिन सूर्य ग्रहण की वजह से ग्रह स्थिति विषम है.

धनतेरस : जानिए पूजन के शुभ मुहूर्त

दोपहर 11.48 से 12.15, 01.30 से 03.00,
शाम 06.00 से रात्रि 09.00 तक।

गादी बदलने का मुहूर्त-
सुबह 09.00 से दोपहर 12.00 तक।

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मेष राशि- मां दुर्गा का मूंगे का लॉकेट, रसोई घर के लिए सफेद धातु की ट्रे या मिठाई, पर सोने की प्लेट खरीदें. जीवनसाथी के लिए चांदी अथवा सफेद धातु का चंद्रहार ले सकते हैं.

वृष राशि– घर के मंदिर के लिए भगवान राधेकृष्ण की सफेद धातु की प्रतिमा. रसोई घर के लिए तांबे का कलश. जीवनसाथी के लिए सोने की चूड़ी़ अथवा अंगूठी ले सकते हैं.

मिथुन राशि- घर के मंदिर के लिए पन्ने या सफेद धातु के श्री यंत्र या गणेश ले सकते हैं. संतान के स्टडी रूम के लिए सफेद धातु या लकड़ी की मेज खरीदें. जीवनसाथी या पिता के लिए पीला पुखराज की अंगूठी खरीदें.

कर्क राशि- माता के लिए मोती अथवा हीरे की अंगूठी. घर के मंदिर के लिए चांदी की बिंदी. पारद का शिवलिंग, चांदी की पिंडी सहित. अपने लिए सोने या चांदी में माणिक्य धारण करें.

सिंह राशि- घर के मंदिर के लिए राम परिवार अथवा लक्ष्मी-विष्णु की मूर्ति सोने या पीले धातु के रूप में खरीदें. जीवनसाथी के लिए सोने या पीले पुखराज का लॉकेट लें. पिता के लिए सफेद धातु में चश्मा या घड़ी.

कन्या राशि- घर के मंदिर के लिए चांदी के लक्ष्मी-गणेश, पारद अथवा सोने के श्रीयंत्र. जीवनसाथी के लिए मूंगे के बने हुए बुंदे और नाक की लौंग. संतान के स्टडी रूम के लिए पीले धातु या सफेद लकड़ी का स्टडी टेबल खरीदें.

तुला राशि- घर के मंदिर के लिए चांदी या अष्टधातु में श्रीविद्या की प्रतिमा और श्रीयंत्र और दक्षिणवर्ती शंख. जीवनसाथी के लिए मूंगे की माला अथवा कंगन. माता के लिए मोतियों की माला और घर के किचन के लिए सफेद धातु में दूध का बर्तन खरीदें.

वृश्चिक राशि- घर के मंदिर के लिए सफेद धातु में गौरीशंकर प्रतिमा लें. तांबे के कलश, पीली धातु का दीपदान लें. रसोईघर के लिए तांबे का कलश और माइक्रोवेब ओवन और जीवनसाथी के लिए मोतियों की माला.

धनु राशि- घर की रसोई के लिए पीली धातु में डिजाइनर टी सेट. घर के मंदिर के लिए भक्तिदुर्गा की पीली धातु अथवा मूंगे की प्रतिमा और संतान के लिए पीली धातु या मूंगे में कंगन या अंगूठी.

मकर राशि- जीवनसाथी के लिए हीरे या चांदी का हार. बेडरूम के लिए सफेद धातु में साइड टेबल. बच्चों की स्टडी के लिए सफेद धातु के फ्रेम में मां सरस्वती की तस्वीर या प्रतिमा. रसोई घर के लिए सफेद रंग की धातु में माइक्रोवेव ओवन या थाली लें, जो लोहे की न हो.

कुंभ राशि- घर के मंदिर के लिए सफेद धातु या चांदी का दीप दान. भगवान बाल कृष्ण की सफेद धातु की झूले सहित प्रतिमा और गणेश. जीवनसाथी के लिए सोना माणिक्य अथवा पुखराज की अंगूठी. माता-पिता के बेड रूम के लिए सफेद धातु से जड़ी हुई चंदन की चौकी या साइड टेबल.

मीन राशि- बच्चों के स्टडी टेबल के लिए सफेद धातु या चांदी का पिरामिड और गणेश, सरस्‍वति की प्रतिमा और घर के मंदिर के लिए मूंगे या पीली धातु के दुर्गा-गणेश, तांबे का कलश. जीवनसाथी के लिए पन्ने या हीरे की अंगूठी. अपने लिए पीला पुखराज.

कब से शुरू हुई धनतेरस की परंपरा…
समुद्र मंथन के अंतिम दिन यानी प्रकाश पर्व दीवाली के दो दिन पूर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पूरे देश में धनतेरस मनाने की पुरानी परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु कलश में अमृत लेकर भगवान धनवंतरि के रूप में प्रकट हुए थे. इसलिए विष्णु की पूजा करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर धनवर्षा करती हैं.

धनवंतरि की पूजा से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी
प्रकाश पर्व दीवाली के दो दिन पहले कोई सामान या धातु खरीदना शगुन होता है. इसीलिए धनतेरस के दिन व्यापारी अपनी दुकानों को सजाते हैं और ग्रामीण और शहरी बढ़-चढ़कर खरीदारी करते हैं. विष्णु पुराण की एक कथा के अनुसार, देवताओं और दैत्यों के बीच युद्ध विराम के बाद हुए समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु कलश में अमृत लेकर भगवान ‘धनवंतरि’ के रूप में प्रकट हुए थे.

जुआ खेलने से नाराज होती हैं लक्ष्मी
बांदा जिले के तेंदुरा गांव के बुजुर्ग पंडित मना महाराज गौतम का कहना है कि इस दिन सुबह स्नान कर सूर्य का जलाभिषेक के बाद भगवान विष्णु की पूजा करने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धनवर्षा करती है. वह बताते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा किसी लालच में नहीं, बल्कि शुद्ध भाव से करनी चाहिए. साथ ही वह कहते हैं कि बुंदेलखंड में इस दिन चौपाल और फड़ों में जुआ खेलने की भी परंपरा है, जो बेहद गलत है. जुआ खेले जाने से लक्ष्मी नाराज होती हैं.

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