रुद्राक्ष धारण के नियम और विधि

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काल संहिता, निर्णय सिंधु इत्यादि ग्रंथों में रुद्राक्ष के महत्व को अभिव्यक्त किया गया है. इन सभी में भगवान शिव के प्रिय ‘रुद्राक्ष’ की महत्ता को व्यक्त किया गया है. इनसे हमें रुद्राक्ष की उत्पत्ति, उसका आकार, उसे धारण करने का तरीका, उससे प्राप्त फल होने वाले फलों का विस्तृत विवेचन प्राप्त होता है. रूद्राक्ष नाम का उच्चारण मात्र ही सभी फलों को प्रदान करने वाला है. इसके नाम को जपने से दान में दस गायों को देने जितना लाभ प्राप्त होता है.

यह रूद्राक्ष भक्तों के समस्त पापों नष्ट कर देता है. इसे पहनकर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. रूद्राक्ष को देखने भर से ही लाखों कष्ट दूर हो जाते हैं और इसे धारण करने पर करोडों लाभ प्राप्त होते हैं तथा इसे पहनकर मंत्र जाप करने से यह और भी ज्यादा प्रभावशाली होता है. रुद्राक्ष धारण करने पर नित्य शिवपूजन एवं रुद्राक्ष की माला से शिव के मंत्रों का जप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं.

रुद्राक्ष धारण करने की विधि और पूजा | Rudraksha Dharan Vidhi and Puja

रुद्राक्ष को धारण करना एक महत्वपूर्ण कार्य होता है. रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व कुछ शुद्ध पवित्र कर्म किए जाते हैं, जिनके उपरांत रुद्राक्ष अभिमंत्रित हो धारण एवं उपयोग करने योग्य बनता है. सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें.

रुद्राक्ष को पांच से सात दिनों तक सरसों के तेल में भिगोकर रखना चाहिए तत्पश्चात रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध, जैसी पवित्र वस्तुओं के साथ े स्नान कराएं तथा रुद्राक्ष को  पंचामृत एवं पंचगव्य से भी स्नान करवाएं और इसके साथ ही “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करें.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर उस पर हवन की भभूति लगाएं, “ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात ||” द्वारा अभिमंत्रित करके पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें. रुद्राक्ष यदि विशेष रुद्राक्ष मंत्रों से धारण न कर सके तो इस सरल विधि का प्रयोग करके धारण कर सकते हैं. रुद्राक्ष के मनकों को शुद्ध लाल धागे में माला तैयार करने के धारण किया जा सकता है.

रुद्राक्ष धारण करने का शुभ मुहूर्त | Rudraksha Dharan – Shubh Muhurat

रूद्राक्ष को पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों में धारण करने पर व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इसके अतिरिक्त ग्रहण में, संक्रांति, अमावस्या में धारण किया जाना चाहिए रुद्राक्ष का आधार ब्रह्मा जी हैं इसकी नाभि विष्णु हैं, इसके चेहरे रुद्र है और इसके छिद्र देवताओं के होते हैं.  रुद्राक्ष के दिव्य गुणों से जीव दुखों से मुक्ति पा कर सुखमय जीवन जीता है तथा भगवान शिव की कृपा को पाता है.

विशेष सावधानी | Precautions

रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक पदार्थों से दूर रहना चाहिए. मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन  आदि का त्याग करना हितकर होता है. आत्मिक शुद्धता के द्वारा ही रुद्राक्ष के लाभ को प्राप्त किया जा सकता है. रुद्राक्ष मन को पवित्र कर विचारों को पवित्र करता है.

रुद्राक्ष-धारण करने से पहले उसके असली होने की जांच अवद्गय करवा लें। असली रुद्राक्ष ही धारण करें। खंडित, कांटों से रहित या कीड़े लगे हुए रुद्राक्ष धारण नहीं करें।

जपादि कार्यों में छोटे और धारण करने में बड़े रुद्राक्षों का ही उपयोग करें। तनाव से मुक्ति हेतु 100 दानों की, अच्छी सेहत एवं आरोग्य के लिए 140 दानों की, अर्थ प्राप्ति के लिए 62 दानों की तथा सभी कामनाओं की पूर्ति हेतु 108 दानों की माला धारण करें। जप आदि कार्यों में 108 दानों की माला ही उपयोगी मानी गई है। अभीष्ट की प्राप्ति के लिए 50 दानों की माला धारण करें। द्गिाव पुराण के अनुसार 26 दानों की माला मस्तक पर, 50 दानों की माला हृदय पर, 16 दानों की माला भुजा पर तथा 12 दानों की माला मणिबंध पर धारण करनी चाहिए।

जिस रुद्राक्ष माला से जप करते हों, उसे धारण नहीं करें। इसी प्रकार जो माला धारण करें, उससे जप न करें। दूसरों के द्वारा उपयोग में लाए गए रुद्राक्ष या रुद्राक्ष माला को प्रयोग में न लाएं।

रुद्राक्ष की प्राण-प्रतिष्ठा कर शुभ मुहूर्त में ही धारण करना चाहिए

ग्रहणे विषुवे चैवमयने संक्रमेऽपि वा।

दर्द्गोषु पूर्णमसे च पूर्णेषु दिवसेषु च।
रुद्राक्षधारणात् सद्यः सर्वपापैर्विमुच्यते॥

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