भवन निर्माण में गलतियों से बचाव, बढ़ेगी शुभता

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घर में वास्तु दोष होने पर उचित यही है कि उसे यथासंभव वास्तुशास्त्र के अनुसार ठीक कर लें अथवा उसे बेचकर दूसरा मकान अथवा जमीन खरीद लें। दुकान की शुभता बढ़ाने के लिए प्रवेश द्वार के दोनों ओर गणपति की मूर्त या स्टिकर लगाएं। एक गणपति की दृष्टि दुकान पर पड़ेगी, दूसरे गणपति की बाहर की ओर पड़ेगी।
रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्रिकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम उसे अवश्य जलाएं।
दक्षिण-पश्चिम दिशा में कई दरवाजे और खिड़कियां हों तो उन्हें बंद करके उन्हें कम कर दें।
यदि प्लाट खरीदे हुए बहुत समय हो गया हो और मकान बनने का योग न आ रहा हो तो उस प्लाट में अनार का पौधा पुष्य नक्षत्र में लगाएं।
फैक्टरी, कारखाने के शुभारंभ के समय चांदी का सर्प पूर्व दिशा में जमीन में गाड़ दें।
घर के दरवाजे पर अपने आप घोड़े के पैर से गिरी नाल टांग दें।
जहां तक हो सके बने हुए मकान में तोड़-फोड़ न करें क्योंकि तोड़-फोड़ करने पर वास्तु भंग का दोष लगता है।
घर में अखंड रूप से रामचरितमानस के 6 पाठ करें इससे वास्तुजनित दोष दूर हो जाता है।
मुख्य द्वार के ऊपर सिंदूर से अंगुल लम्बा तथा 6 अंगुल चौड़ा स्वास्तिक का निशान बनाएं। घर में जहां-जहां वास्तु दोष हो वहां-वहां पर यह चिन्ह बनाएं।
घर में 6 दिन तक अखंड भगवान्नाम-कीर्तन करने से वास्तुजनित दोष का निवारण होता है।
घर पुराना होने पर, दीवार के गिर जाने पर या छिन्न-भिन्न हो जाने पर उसे सोने से बने हुए नागदंत यानी हाथीदांत या गौ के सींग से वास्तु पूजन पूर्वक गिरवाने से वास्तु भंग का दोष नहीं लगता।

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