जहाँ दूसरों को समझना मुश्किल हो जाए, वहाँ खुद को समझ लेना बेहतर होता है.

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दर्द सबके एक मगर हौंसले सबके अलग अलग है, कोई बिखर के मुस्कुराया तो कोई मुस्कुरा के बिखर गया !!

वक्त बहुत कुछ च्चीं लेता है… मेरी तो बसस मुस्कुरहत थी…!!

कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पडती है…मै इनको कैसे समझाऊँ..कि कोई शख्स चाहने से अपना नही होता..

इन्सानियत तो हमने ब्लड बैंक से सीखी है… जहां बोतल पर मजहब नहीं लिखा जाता..

रिश्ता निभना हर किसी के बस की बात नही….!!अपना दिल दुखना पड़ता है.. किसी ओर की ख़ुसी के लिए….!!!

कर सकता था में भी मोहब्बतउससे,पर सोचा, हसीन हैं? तो बेवफा भी होगी ?

किचन में माँ बहुत रोती है,पकवानों की खुशबू होने के बावजूद किसी त्योहार पर बेटा, जब उसका घर नहीं होता…!!

खुदा सवाल करेगा अगर क़यामत में, तो हम भी कह देंगे लुट गए हम शराफत में…

बस ख़ामोशी जला देती है इस दिल को.. बाकि तो सब बाते अच्छी है तेरी तस्वीर में…

ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो, ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है…

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कैसे चलूँ तेरे_एहसास के बिना दो_कदम भी मैं, लड़खड़ाती जिदंगी की आखरी_बैसाखी हो तुम..

मेरी कोशीश हमेशा ही नाकाम रही पहले तूझे पाने की और अब तुझे भुलाने की

मुजे कोइ ऐसी जगह ले चलो जहा रहु सिर्फ मे और मेरी तन्हाई

मोहब्बत ख़ूबसूरत होगी किसी और दुनियाँ में इधर तो हम पर जो गुज़री है हम ही जानते हैं

साथी तो मुझे अपने सुख के लिए चाहिए दुखों के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ…..

इतने कहाँ मशरूफ हो गए हो तुम, आजकल दिल दुखाने भी नहीं आते…!

यू पलटा मेरी किस्मत का सितारा मेरे दोस्तो उसने भी छोड़ दिया और अपनों ने भी

वाकिफ़ है वो मेरी कमज़ोरी से…! वो रो देती है, और मैं हार जाता हूँ…

मैने सिखी नही कोई शायरी महफिलों मे जाकर ! हालात अक्सर दर्द सहना सिखा देते है

मुश्किल होता है जवाब देना. जब कोई खामोश रह करभी सवाल कर लेता है!

बहुत गुरूर था सबकॉ अपनी दौलत पे.. ज़रा सा ज़मीन क्या हीली सब औकात मे आ गये..

दुआ कभी खाली नही जाती, बस लोग इंतजार नही करते..

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे, कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे !!

दिन ऐसे गुजारो की रात को चैन से सो सको.. और रात ऐसी गुजारो की सुबह खुद से नजरे मिला सको.

देखना.. एक दिन बदल जाऊगा पूरी तरह मैं तुम्हारे लिए न सही.. लेकिन… तुम्हारी वजह से ही सही..!!

देखकर तुमको अकसर हमें एहसास होता है कभी कभी ग़म देने वाला भी कितना ख़ास होता है.

दुनिया को इतना सीरियस लेने की जरुरत नहीं, यहाँ से कोई जिन्दा बच के नहीं जाएगा..!!!

दुआ कभी खाली नही जाती, बस लोग इंतजार नही करते.

नाम और बदनाम में क्या फर्क है ? नाम खुद कमाना पड़ता है,और बदनामी लोग आपको कमा के देते हैं!

ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

तरक्की की फसल, हम भी ‘काट’ लेते… थोड़े से तलवे, अगर ‘हम’ भी चाट लेते.

तेरी मोहब्बत पर मेरा हक़ तो नही मगर.. जी चाहता है क़ि आखिरी सांस तक तेरा इन्तजार करू..!!

तेरे ही नाम से ज़ाना जाता हूं मैं, ना जाने ये शोहरत है या बदनामी.

तुम वादा करो आखरी दीदार करने आओगे, हम मौत को भी इंतजार करवाएँगे तेरी ख़ातिर,

बात इतनी सी थी कि तुम अच्छे लगते थे, अब बात इतनी बढ़ गई है कि तुम बिन कुछ अच्छा नहीं लगता!!!

बेमतलब की जिंदगी का सिलसिला ख़त्म..!अब जिसतरह की दुनियां, उस तरह के हम…!!

मंदिर भी क्या गज़ब की जगह है! गरीब बाहर भीख मांगते हैं, और अमीर अन्दर.

मालुम था कुछ नही होगा हासिल लेकिन… वो इश्क ही क्या जिसमें खुद को ना गवायाँ जाए.

मैंने समुन्दर से सीखा है जीने का सलीका, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना.

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